एक आँसू

दीदी के दो बार पूछने पर कि बेबी आज तू फिर बहुत अनमनी है, क्या हुआ दीदी को नहीं बताएगी, बेबी से नहीं रहा गया; फफ़क पड़ी.
दीदी उसका सिर अपनी गोद में रख कर सहलाने लगी.
” दीदी आपको देखो जीजाजी कैसे हाथों पर रखते हैं. जान जान करते मुँह सूखता है उनका. और इनको देखो, बात बात पर झगड़ा, जली कटी. एक दिन राज़ी खुशी नहीं जाता.”
दीदी ने कहा,” नहीं रे पगली, ऐसा नहीं सोचते. तू बहुत सुखी है.”
और एक गर्म आँसू बेबी के सिर पर टपका. वह चौंक कर खड़ी हो गयी.
” दीदी आप रो रही हैं?”
” नहीं तो रे. मैंने तो बीस साल पहले ही इस मन को मांज धोकर सूखा कर रख दिया था. पता नहीं यह एक आँसू निगोडा कहाँ अटका रह गया था.”
” क्या कह रही हो दीदी?” बेबी बौखला गई.
दीदी ने संयत होकर कहा,” मैंने ५ साल तक उनको टूट कर प्यार किया. बेल की तरह उनसे लिपटी रही. पर जैसे ही पता चला शादी के पहले दिन से ही कोई ओर भी उनसे लिपटी हुई है, मैं एकदम सूख गई. सब ख़त्म हो गया. आज बीस साल हो गये.
बेबी ने सहमे हुए कहा, ” आप और जीजाजी इतने खुश दिखते हैं. और बीस साल से…? .. ‘बोलते’ भी हैं या नहीं?”
दीदी ने शून्य में देखते हुए कहा,” ‘बोलने’ की कोशिश करते हैं वे. पर मुझे लगता है कोई कठफोड़वा पेड़ के तने से चोंच रगड़ रहा है. मैं काठ हो चुकी हूँ.”
इतने में बेबी का मोबाइल बजा. वह उठा कर थोड़ी दूर चली गई.
” पहुँच गई दीदी के पास. तुम कितनी ओछी औरत हो. ज़रा सा झगड़ा हुआ नहीं की रोने को घुटना चाहिए तुम्हें.”
” राजेश प्लीज़ उल्टा सीधा मत बोलो. मैं आ रही हूँ, थोड़ी देर में.” उसने फोन काट दिया.
दीदी मुस्कुरा कर बोली,” जाओ, अपने घर जाओ. जाकर फिर झगडो. खूब बुरा भला कहो एक दूसरे को. रात को मुँह फेर कर सो जाओ. और फिर देर रात एक दूसरे की छाती में मुँह डाल कर खूब रोओ….. जाओ, तुम बहुत सुखी हो रे पगली.”

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