प्यार से आगे की कथा

बिहानपुर के राजा ने जब बीरनदे को देखा तो साँस रुक सी गयी. सुघड़ देह, तीखे नयन, स्फटिक रंग- नज़र हटाए नहीं हटी. अपने आप को रोक नहीं पाए, ‘ आप हमारे महल की रानी बनेंगी?’
बीरन ने अपने पुरखुलूस अंदाज़ में कहा,’ महाराज , कहाँ आप और कहाँ मैं ,एक तवायफ़. मान बख्शने के लिए बहुत शुक्रिया. पर माफ़ कीजिए, मैं जहाँ हूँ वही मेरी जगह है.’
राजा को अपमान भी लगा और आश्चर्य भी हुआ.
राजा का चेहरा देख बीरन ने बात संभाली’, ‘ एक बेलगाम तवायफ़ कभी महल की रानी नहीं हो सकती, महाराज .’
राजा ने संयम दिखाया. रोज़ बीरनदे से मिलने लगा और आख़िर महल में रानी बन कर रहने के लिए राज़ी कर लिया. कुछ दिन, प्यार की बौछार में बीरन और राजा सराबोर रहे.
ज़िंदगी को नाच कूद कर सामान्य होने की आदत है. उदासी सामान्यता का बीज लक्षण है. ऐसे ही किसी उदासी के पल में राजा ने बीरन से प्यार की मनुहार कर दी .बीरन की ना कहने की आदत जो मन में कहीं छुप गई थी, होंठों पर आ गयी. राजा के लिए ना भी हाँ ही होती है, बस उस बेचारी ना को थोड़ा आक्रोश झेलना पड़ता है. राजा ने बीरन के साथ बलात अपनी काम पिपासा बुझाई. उसे आभास भी नहीं हुआ कि बीरन के मन में विद्रोह जाग गया है . एक तवायफ़ के आज़ाद मन का विद्रोह.
दूसरे दिन सूरज उगने से पहले ही बीरन पालकी में बैठ कर वापस अपने कोठे पर आ गयी.
राजा क्रोध से आग बगुला हो गया. पर एक तवायफ़ की जान लेने के कलंक से डर गया.
क्या करता? सम्मान भी बचाना था.. आख़िर घोषणा करवा दी, ‘ अगर किसी ने भी बीरन के दर पर कदम रखा तो सर कटवा दिया जाएगा. बीरन का कोठा वीरान हो गया. दो साल बीत गये, कभी दरवाज़ा तक नहीं खुला.
एक दिन दस्तक हुई. बीरन ने झाँक कर देखा तो एक खूबसूरत नौजवान खड़ा था. उसने हिचकते हुए दरवाज़ा खोला और उसे अंदर आने दिया.
” तुम्हें पता है ना अगर राजा को पता चल गया तो तुम्हारा बीच चौराहे सर कटवा दिया जाएगा?”
‘पता है, मगर मुझे इसकी कोई परवाह नहीं, मुझे तुमसे प्यार हो गया है.’ नौजवान के चेहरे पर विश्वास था.
ऐसा निडर प्यार किसे नहीं मोम कर देगा. बीरन विस्मित थी.
उसने पूछा, ‘ पर एक बात बताओ, इतनी जवान और खूबसूरत लड़कियाँ है बिहानपुर में, मैं तो एक तवायफ़ हूँ, मेरी जवानी भी ढल रही है. ऐसा क्या देखा मुझ में कि अपनी जान हथेली पर रख कर तुम मुझ से प्यार करने चले आए.
नौजवान ने पूरे आत्म- विश्वास से कहा,” देखो, लड़कियाँ बहुत है, एक से एक खूबसूरत और गुणवती, पर उनमें कोई कभी रानी नहीं रही.”
बीरन ने नौजवान की आँखों में देखा, उठ कर उसके पास आई, और एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया.
” बाहर निकल जाओ यहाँ से. पुरुष केवल अपने अहम से प्यार करता है. समर्पण क्या होता है उसे पता ही नहीं.

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