मीरा

एक अनाथ छोटी सी लड़की को किसी धनाढ्य विधवा की विशाल हवेली में ठौर मिल जाए तो सौभाग्य ही कहेंगे. धनी विधवा कोई कर्कश औरत भी नहीं थी. बस इतना ज़रूर था कि बड़े होते होते मीरा को यह एहसास हो गया था कि पास होकर भी उसके और इस कोमल धनी औरत के बीच एक अभेद्य शून्य था जो ना कभी दिखा ना कभी पार हुआ.
लिहाजा नौकर ना होकर भी मीरा नौकरों के साथ ही घुल मिलकर रहती थी. रिश्तों और सोने बैठने की इस विषम सी संरचना में एक दिन नये आए माली को अंधेरे में चोर रास्ता मिल गया और उसने मीरा के साथ जिसे हम सही संज्ञा से बचने के लिए कुकर्म कहते हैं, कर दिया. मीरा ने अपनी आंटी और माली की मैडम को जब दूसरे दिन सब बताया तो माली को बुरा भला कह कर निकाल दिया गया. मीरा को अपने कीमती मगर वस्तु होने का एहसास भी उस दिन हो गया.
धरती मगर फटी तीन महीने बाद जब खेली खाई मैडम और उल्टी करती मीरा के एक लघु संवाद का अर्थ निकला: मीरा गर्भवती है. बड़े नपे तुले शब्दों में उस दिन आंटी ने मीरा को बताया कि बदचलनी इंसान के खून में होती है. उसकी अज्ञात माँ का सन्क्षिप्त चरित्र- चित्रण किया गया और उसके कपड़े और कहीं दूर जाने का खर्चा हाथ में थमा दिया गया.
उतने पैसे से मीरा जहाँ तक जा सकती थी, गयी. फिर थक कर ठहर गयी. पेट में बच्चा था जिसका कोई बाप नहीं था.
उसने घबराकर सूरज की तरफ देखा और अनुनय से पूछा, ” मेरे बच्चे के बाप बनोगे?’
सूरज ने सुना और चुपचाप बादल के पीछे चला गया. रात हुई तो चाँद आया. मीरा ने चाँद से भी वही सवाल पूछा, पर चाँद ने भी अनसुना कर दिया. उसे कुछ देवताओं के नाम याद थे. उसने सब से एक एक करके पूछा पर सबने चुप्पी साधे रखी. जिस वट, पीपल, और नींम के नीचे बैठी, सबसे पूछा,'”मेरे बच्चे के बाप बनोगे?” सब मौन थे.
मीरा मंदिर के दरवाज़े आकर बैठ गयी. अब तो उसका गर्भ दूर से ही दिखने लगा था.
पुजारी ने पूछा, ” क्या चाहिए?’
मीरा ने सहज स्वर में कहा,” मेरे बच्चे का बाप.”
“तो यहाँ क्या कर रही हो, वहाँ जाओ जिसके साथ मुँह काला किया है” , पुजारी ने तुनक कर कहा.
“यहीं है मेरे बच्चे का बाप” , मीरा अड़ गयी.
“कौन है यहाँ तेरे बच्चे का बाप ? “, पुजारी क्रोधित हो गया.
“भगवान… भगवान ही है मेरे बच्चे का बाप.” पुजारी समझा नहीं
“एक दिन भगवान अंधेरे में आया था मेरे पास. यह उसी का बच्चा है”
पुजारी आग बगुला हो गया,” बद्जात लड़की, शर्म नहीं आती.”
भक्तों को पुकारा,” अरे इस राक्षसी की हिम्मत तो देखो. धक्के मार कर भगाओ इसे.”
मीरा गली गली भटकने लगी. सबको रास्ता रोक कर कहने लगी,’ देखो मेरे पेट में भगवान का बच्चा है. एक रात अंधेरे में भगवान आया था मेरे पास.”
कुछ ने कहा यह लड़की पागल है. मगर कुछ और भक्त थे जो चिल्लाए, “पागल नहीं है यह , राक्षसी है, राक्षसी . मार डालो इसे नहीं तो धर्म का नाश हो जाएगा.”
पत्थर और लाठी लेकर लोग उस पर टूट पड़े.
मीरा लहुलुहान सड़क पर पड़ी थी. उसके चेहरे पर मुस्कान थी और आँखों में आँसू झर रहे थे.
मन ही मन कह रही थी- ‘तुम कितने दयालु हो भगवान. देखो मैने तुम पर झूठा आरोप लगाया पर फिर भी तुमने मेरे सब दुख हर लिए.’
“तुम सचमुच कृपानिधान हो प्रभु.”
उसकी आँखें बंद हो गई

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