रीक्लेमेशन

चरित्रहीन पुरुष दूध पीती बिल्ली की तरह होता है; नीयत से चालक पर आत्मा से अँधा. राकेश जितना मृदुल है, चरित्र का उतना ही ढीला. ऐसे पुरुषों के हिस्से दो तरह की पत्नियाँ आती हैं. एक तो वे सीधी सरल जिनके लिए सच उतना ही होता है जितना कि वे जानती हैं, और दूसरी वे जो मन के क्षय को पूरा करने के लिए अपना अधिकार क्षेत्र थोड़ा बढ़ा लेती हैं जैसे धरती समुद्र से अपने पाटे हुए हिस्से को धीरे धीरे रीक्लेम कर लेती है. राकेशों से लिपटी औरतें इस कहानी का हिस्सा नहीं हैं. अपनी पूनम भी पहली तरह की थी…. मगर पहले पहले.
ऐसा चरित्र एक दिन उजागर तो होता है पर कभी भी गुनहगार रंगे हाथों अर्थात विथ पेंट्स डाउन नहीं पकड़ा जाता है. लाज़िम है, जब कबूतर जैसा आलसी परिंदा और कुत्ते जैसा निर्लज्ज जानवर ही यदा कदा यह ‘जुर्म’ करते पकड़े जाते हैं तो स्त्री-पुरुष तो बंद सुरक्षित कमरों में रहने वाले जीव हैं. और फिर इस ज्ञान के लिए कि कभी ग़लत समय घंटी बज जाए तो सबसे पहले कपड़े पहन कर बाल ठीक करने होते हैं, कॉलर सीधी करनी होती है या बिंदी, लिपस्टिक जांचनी होती है, कोई काम-शास्त्र पढ़ने की ज़रूरत नहीं है. और इतना बस हो जाए तो शातिरमन लागों को कई दरवाज़े मिल जाते हैं.
राकेश को मरवाया उसके मोबाइल ने. ऐसे मेसेज थे कि संदेह के लिए कुछ नहीं था जो कुछ था कल्पना के लिए, एक से एक बढ़ कर, कि जब आमना सामना हुआ तो पूनम को इतना ही बोलना था, ” अब कुछ नहीं बचा है.”
राकेश की सौम्यता ने अपराध-भाव पहना, और हाथ सीधा पूनम के घुटने पर रखा जो इस स्थिति में झटका जाना ही था.
” मैं तुम्हारा गुनहगार हूँ पूनम मुझे माफ़ कर दो.”
पूनम को लगा किसी ने उसकी गर्दन पकड़ कर पानी में दबोच दी है.
आधे मिनिट के बाद उसे साँस आया जब राकेश ने कहा, “तुम मेरी बात का विश्वास नहीं करोगी पर इस औरत से मेरा कोई शारीरिक संबंध नहीं है. मैं बहक गया था, और यह देखना चाह रहा था कि यह औरत किस हद तक जा सकती है. फिर भी मुझसे वही गुनाह हुआ है जो मैने दरअसल नहीं किया है.”
क्या बात है? ताली बजाने का जी करता है. झूठ वह तिनका है जो डूबते को सचमुच बचा सकता है.
इधर अपनी पूनम भी कितनी ही सीधी हो पर उसे एक एहसास था कि राकेश के रिश्ते में वफ़ाई छोड़ कर उसे बहुत कुछ मिला है. और शादी के कुछ महीने बाद ही अपना पूरा अस्तित्व जो उसने राकेश को सौंप दिया था, थोड़ा थोड़ा रीक्लेम करना शुरू कर दिया था. कोई था जिससे वह अपने अंतर्मन के भाव बाँटने लगी थी.
इस घटना के बाद उसने इस को, जो कोई भी था, हल्का सा छूने दिया. हल्के से स्पर्श से थोड़ा और रीक्लेम किया अपना खोया हुआ हिस्सा.
पर विश्वास कीजिए, वह समुद्र से ऊपर रहेगी. उसे जीना है. ना प्यार करना है, ना समर्पण. वह जानती है.

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