सुरक्षित जगह

“देख रहो हो, कितना शांत और पॉश एरिया है. चाणक्यपुरी है यह, डिप्लोमॅटिक एन्कलेव- परिंदा भी पर नहीं मार सकता, ऐसी सेक्यूरिटी है यहाँ. अब यहाँ से सीधे चलते रहो.. चलते रहो. तो यह आ गया इंडिया गेट, सुना ही होगा. बाईं ओर राष्ट्रपति भवन है, उसका तो ज़िक्र ही छोड़ो. हवा भी पूछ कर अंदर जाती है. जगह जगह बॅरिकेड देख ही रहे हो. अपने को उधर नहीं जाना, दाहिनी ओर से घूम कर सीधा कनॉट प्लेस, अपना राजीव चौक! भीड़ है थोड़ी पर आजकल सीसीटीवी और क्या क्या, सेक्यूरिटी यहाँ भी बहुत है अब. बस इधर से मुड़ते ही नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन. यहाँ तो आपको पता ही होगा आजकल, मेटल डिटेक्टर लगे हैं, और पुलिस दुनिया भर की. पर अपने को स्टेशन किस लिए जाना है. यहाँ से राइट होकर निकल जाएँगे तो आगे विकास मार्ग है ही. पुलिस मुख्यालय पर तो कहने की बात ही नहीं है किस तरह की तैनाती है. आगे ब्रिज है यमुना के ऊपर से जाने के लिए. पर अपन नीचे ही चलेंगे. सड़क से उतर जाते हैं. जंगल सा है थोड़ा… घबराईए मत… डरने की कोई बात नहीं.
” अरे मगर यहाँ क्यों ले आए भाई. क्या है यहाँ. सुनसान पड़ा है सब.”
” ठहरिए तो सही. यह देखिए… हाँ यह मैला सा कपड़ा.. खींचिए.. खींचिए थोड़ा.”
” अरे यह तो आदमी है कोई!”
” बिल्कुल सही पहचाना आपने, आदमी है यह.”
” कई दिनों से भूखा है बेचारा शायद.”
” भूखा था, मगर अब इसकी भूख मर चुकी है.”
” बीमार भी लगता है?”
” आज से नहीं काफ़ी अरसे से.”
“मगर यहाँ क्यों पड़ा है?”
क्योंकि यह सबसे सुरक्षित जगह है. यहाँ कोई नहीं है. ना भीड़, ना शोर शराबा, ना पुलिस ना कोई चेकिंग… ना नेता, ना कोई भाषण. कुछ भी नहीं है.. विकास.. जीडीपी… मुद्रा स्फीति… महंगाई… आतंकवाद…कुछ भी नहीं. बस आप और आप की मौत, दोनों, बीच में कोई नहीं. यह है सबसे सुरक्षित जगह

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