अंतराल

जब उसे पता चला कि सड़क पर उसकी लाश पड़ी मिली है, वह टीवी देख रहा था. उसने तुरंत टीवी बंद किया.
अपनी मौत से घबराकर कई दिन वह घर से बाहर नहीं निकला. कुछ दिन बाद, जब बहुत सी मौतों के नीचे उसकी मौत की खबर दब गयी, वह सब की नज़र बचाकर ऐर्पोट पहुँचा. उसे जल्द से जल्द अपने गाँव जाकर अपनी माँ से मिलना था.
गाँव पहुँचा तो हक्का बक्का रह गया.
गाँव तो कुछ और ही हो गया था. गली गलियारे सब बदल गये थे. वहाँ उसे कोई नहीं पहचानता था. दो साल में इतना बदलाव… उसे विश्वास नहीं हो रहा था. उसे एक बूढ़ा आदमी दिखा. उसने हिम्मत करके पूछा, ” बाबा, इस गाँव में एक देवकी नाम की औरत थी, मैं उसी का लड़का हूँ. दो साल पहले मैं बंबई चला गया था. यहाँ तो दो साल में सब कुछ बदल गया है.”
बूढ़े ने कुछ देर सोच कर कहा, ” बेटा तुम बहुत देर से आए हो. मैं बच्चा था तो मैने सुना था कि देवकी नाम की एक विधवा का लड़का बंबई गया था और फिर कभी नहीं लौटा. देवकी उसकी बाट देखती मर गयी.”
उसका दिल किया कि चिल्लाकर सबको बताए, ” ऐसा कैसे हो सकता है? मैं बस दो साल पहले यह गाँव छोड़ कर गया हूँ.”
पर जैसे ही अपनी लाश के सड़क पर पड़े होने की खबर का ध्यान आया, वह चुपचाप वहाँ से निकल गया. दरअसल जब वह अपने कामकाज में व्यस्त था, समय ने उसकी अंगुली छोड़ दी थी और वह एक अंतराल में चला गया था. हमेशा के लिए.

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