सुनयना भाभी

मेरे किशोर मन को लगा था जगन भैय्या को ही नहीं सुनयना भाभी ने मुझे भी धोखा दिया है. मन में उनके लिए नफरत भर आयी, और मैं फिर कभी भी उनके घर की तरफ़ नहीं गया.
एक समय था कि कॉलेज से लौटता तो उनको देखने के लिए आँखें तरसा करती. पुराने सिनेमा की नायिका सी, भरी भरी काया, चंचल आँखें और मतवाली चाल. रेडियो लगा कर काम में मग्न रहती, रोमांटिक गाना आया तो साथ साथ गुनगुनाती. महीना होने से पहले याद दिला देती, ” सत्तन बाबू, हमारी नूरी काजल याद करके ले आना.”
उनकी आंखों में अपनी लायी काजल देख कर अन्तरंगता का एहसास होता.
लंबे बालों का फैशन था, अकेली होती तो बाँह पकड़ के बिठा लेती, ” क्या यह सूखी लंबी ज़ुल्फों में हीरो बने फिरते हो, शादी से पहले ही गंजे हो जाओगे. लाओ थोड़ा तेल लगा दूँ.”
कभी प्रेमिका सी मनुहार तो कभी माँ सा दुलार. मैं बौराया रहता था.
जगन भैय्या महीने में बीस दिन टूर पर रहते थे. सीधे इंसान थे. सुनयना भाभी का दरवाज़ा सबके लिए खुला था.
एक दिन ओमी चाचा ने निकलते ही मुझे झप लिया, ‘ अबे हीरो, अभी तेरी मसें भी नहीं फूटी हैं. कई पाल रखे हैं इसने तेरे जैसे.”
मैं नीची गर्दन करके खिसक लिया. कान दिया तो ओमी चाचा की बात सही लगी . सुनयना भाभी , कहना नहीं बनता, मुझे वेश्या लगने लगी.
अब के बुआ आयी तो बेगाहे सुनयना भाभी का नाम निकल आया. बोली, ” क्या बताऊँ, पूरे जहान में भी ऐसी औरत नहीं मिलेगी. पति अपंग पड़ा है, कोढ़ सा निकला है कुछ. गन्दी बीमारी ले आया कोई. पर जो उसकी सेवा करती है, पूछो मत. और फिर पूरे गाँव की बूढी औरतों के, एक तेल आता है सांडू का, उससे जोड़ों पर मालिश करती है. सारा गाँव बड़ाई करते नहीं थकता. ”
35 बरस बाद सुनयना भाभी से मिलने की ललक मेरे मन में अचानक जाग आयी.
दो मिनट तो घूर कर देखती रही, फिर जो फफक कर रोयी, ” अरे सत्तन बाबू, किधर रास्ता भूले रे आज. अरे ऐसा क्या कर दिया था हमने. तुम तो उमर भर के लिए ही बिसरा दिए. देखो तो रे बबुआ, इन अंखियन ने फिर कभी काजल नही देखा रे. ”
उमड़ते ज्वार को रोकने के लिए मैं अपनी छाती मसलने लगा. फिर मेरे सर पर हाथ फेरती हुई बोली, ” मैं बोलती थी ना गंजे हो जाओगे.” और मुस्कुरा दी, जैसे बारिश होते धूप निकल आती है कभी कभी,
चाय पकौड़े के बाद सहज हुआ तो बोला, ” अब आता रहूंगा भाभी. कहो तो नूरी काजल लेता आऊ.”
संजीदा होकर बोली, ” नहीं रे सत्तन बाबू ,गए वो दिन. हाँ .. हो सके तो सांडू के तेल की एक दो शीशी ले आना. बहुत लगता है. ”
मुझे लगा मैं बहुत अदना हूँ.

Advertisements